गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर काफी समय से बीमार चल रहे हैं. उन्हें कैंसर होने की बातें तो अनऑफिशियली अक्सर होती रहीं लेकिन किसी भरोसेमंद सूत्र से इसकी कभी पुष्टि नहीं हुई. अब हो गई है. गोवा के स्वास्थ्य मंत्री विश्वजीत राणे ने खुलासा किया कि मनोहर पर्रिकर को पैनक्रिएटिक कैंसर है. उनका उनके घर पर इलाज हो रहा है.
विश्वजीत राणे ने नॉर्थ गोवा में इमरजेंसी केयर सेंटर के उद्धाटन समारोह में ये बात कही. उन्होंने बोला, “वो गोवा के मुख्यमंत्री हैं और ये हकीकत है कि वो ठीक नहीं हैं. उन्हें पैनक्रिएटिक कैंसर है. कोई इस बात को छुपा नहीं रहा.” उन्होंने आगे ये भी कहा, “आप लोगों को उनकी हालत पता है. उन्हें हाल ही में एम्स से लाया गया और अब वो अपने घर पर हैं. उन्हें अपने परिवार के साथ शांति से रहने दीजिए.”
पिछले कुछ दिनों से विपक्ष ने सरकार पर दबाव बना रखा था कि वो पर्रिकर का हेल्थ बुलेटिन जारी करें. अब ऑफिशियली ये कन्फर्म हो गया है कि उनको पैनक्रिएटिक कैंसर है.
क्या होता है ये पैनक्रियाज़?
गूगल पर पैनक्रियाज़ का हिंदी ढूंढोगे तो मिलेगा ‘अग्नाशय’. कुछ समझ नहीं आएगा. समझने लायक भाषा में पैनक्रियाज़ के बारे में जानना चाहते हैं, तो आगे पढ़िए.
अग्नाशय (pancreas) एक ग्रंथि है, जो पेट में होती है और पाचन तंत्र का हिस्सा है. मने खाना पचाने के वक़्त काम आती है. यह पेट के ऊपरी बाएं भाग में काफी गहराई में होते हैं. यूं समझ लीजिए कि आपके पेट और रीढ़ की हड्डी में सैंडविच बने हुए. इसका एक हिस्सा वहां होता है जहां छोटी आंत का पहला भाग होता है.
क्या काम है इनका?
यह इंसुलिन (insulin) तथा बाकी के महत्वपूर्ण एंज़ाइम्स और हार्मोन्स पैदा करते हैं. एंज़ाइम्स और पाचक रस, पैनक्रियाज़ से निकलकर छोटी आंत में भेजे जाते हैं. जहां ये खाए हुए खाने को तोड़ने में मदद करते हैं. यानी आसान भाषा में ये समझ लीजिए कि खाने को ऊर्जा में बदल देते हैं. इसी से शरीर को ताकत मिलती है.
पैनक्रियाज़ जो इंसुलिन बनाते हैं वो खून में मिलकर शरीर के ग्लूकोज़ लेवल को कंट्रोल करते हैं. ये तो आपको पता ही होगा कि शुगर लेवल में गड़बड़ी डायबिटीज़ को जन्म देती है.
यानी मोटा-मोटा देखा जाए तो इसके दो मेन काम हैं:
1. खाना पचाने में मदद करना
2. ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखना
कितना खतरनाक है ये पैनक्रिएटिक कैंसर?
इस कैंसर की भयानकता इसी बात से जान लीजिए कि इसे साइलेंट किलर कहा जाता है. वो इसलिए क्योंकि शुरुआत में इसके लक्षणों के आधार पर इसकी जल्दी पहचान करना बड़ा मुश्किल है. और बाद के लक्षण हर एक आदमी में अलग-अलग होते हैं. किसी को पेट के ऊपरी हिस्से में बेतहाशा दर्द होता है तो किसी का वज़न तेज़ी से गिरता है. पीलिया हो जाना, नाक से खून बहना, भूख कम लगना भी इसके लक्षणों में शामिल हैं.
कहते हैं कि अगर शुरूआती दौर में भी इसका पता लग जाए तब भी इसको रोकना बेहद मुश्किल होता है. और ये बात तो है ही के ये जल्दी डिटेक्ट नहीं होता. इस कैंसर के होने में धूमप्रान से लेकर आहार में हरी सब्जियों की कमी तक कई वजहें बताई जाती हैं.
इलाज कैसे होता है?
1. सर्जरी
सर्जरी इकलौता ऐसा उपाय है जो इस कैंसर को पूरी तरह से ठीक कर सकता है. हालांकि इसमें भी पेंच है. कैंसर का पता लगने से लेकर सर्जरी की नौबत आने तक कैंसर काफी रफ़्तार से बढ़ जाता है. ऐसे में सर्जरी का सक्सेस रेट 15 से 20 परसेंट ही रह जाता है. और अगर कैंसर शरीर में और जगह फ़ैल गया तो सर्जरी के बाद भी इंसान ठीक नहीं होता.
2. रेडियोथेरेपी
इस थेरेपी में कैंसर ग्रस्त एरिया को रेडियो किरणों द्वारा नष्ट करने की कोशिश होती है.
3. कीमोथेरेपी.
कीमोथेरेपी की दवाएं शरीर में फ़ैल रही कैंसर सेल्स को या तो ख़त्म करती हैं या उन्हें बढ़ने से रोकती हैं. अक्सर कीमोथेरेपी, सर्जरी और रेडियोथेरेपी के साथ मिलाकर की जाती है. ताकि ज़्यादा से ज़्यादा एक्यूरेसी से इलाज संभव हो सके. कीमोथेरेपी की कुछ दवाएं खाई जाती है तो कुछ दवाओं को नसों में इंजेक्ट किया जाता है.
जैसे-जैसे कैंसर बढ़ता जाता है, केस कॉम्प्लिकेटेड होता जाता है. भयानक दर्द तो होता ही है साथ ही छोटी आंत की फंक्शनिंग में भी रुकावट पैदा होती है. वज़न तेज़ी से घटने लगता है. ये कैंसर महिलाओं के मुकाबले पुरुषों में ज़्यादा पाया जाता है. वो भी बड़ी उम्र के मर्दों में.
विश्वजीत राणे ने नॉर्थ गोवा में इमरजेंसी केयर सेंटर के उद्धाटन समारोह में ये बात कही. उन्होंने बोला, “वो गोवा के मुख्यमंत्री हैं और ये हकीकत है कि वो ठीक नहीं हैं. उन्हें पैनक्रिएटिक कैंसर है. कोई इस बात को छुपा नहीं रहा.” उन्होंने आगे ये भी कहा, “आप लोगों को उनकी हालत पता है. उन्हें हाल ही में एम्स से लाया गया और अब वो अपने घर पर हैं. उन्हें अपने परिवार के साथ शांति से रहने दीजिए.”
पिछले कुछ दिनों से विपक्ष ने सरकार पर दबाव बना रखा था कि वो पर्रिकर का हेल्थ बुलेटिन जारी करें. अब ऑफिशियली ये कन्फर्म हो गया है कि उनको पैनक्रिएटिक कैंसर है.
क्या होता है ये पैनक्रियाज़?
गूगल पर पैनक्रियाज़ का हिंदी ढूंढोगे तो मिलेगा ‘अग्नाशय’. कुछ समझ नहीं आएगा. समझने लायक भाषा में पैनक्रियाज़ के बारे में जानना चाहते हैं, तो आगे पढ़िए.
अग्नाशय (pancreas) एक ग्रंथि है, जो पेट में होती है और पाचन तंत्र का हिस्सा है. मने खाना पचाने के वक़्त काम आती है. यह पेट के ऊपरी बाएं भाग में काफी गहराई में होते हैं. यूं समझ लीजिए कि आपके पेट और रीढ़ की हड्डी में सैंडविच बने हुए. इसका एक हिस्सा वहां होता है जहां छोटी आंत का पहला भाग होता है.
क्या काम है इनका?
यह इंसुलिन (insulin) तथा बाकी के महत्वपूर्ण एंज़ाइम्स और हार्मोन्स पैदा करते हैं. एंज़ाइम्स और पाचक रस, पैनक्रियाज़ से निकलकर छोटी आंत में भेजे जाते हैं. जहां ये खाए हुए खाने को तोड़ने में मदद करते हैं. यानी आसान भाषा में ये समझ लीजिए कि खाने को ऊर्जा में बदल देते हैं. इसी से शरीर को ताकत मिलती है.
पैनक्रियाज़ जो इंसुलिन बनाते हैं वो खून में मिलकर शरीर के ग्लूकोज़ लेवल को कंट्रोल करते हैं. ये तो आपको पता ही होगा कि शुगर लेवल में गड़बड़ी डायबिटीज़ को जन्म देती है.
यानी मोटा-मोटा देखा जाए तो इसके दो मेन काम हैं:
1. खाना पचाने में मदद करना
2. ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखना
कितना खतरनाक है ये पैनक्रिएटिक कैंसर?
इस कैंसर की भयानकता इसी बात से जान लीजिए कि इसे साइलेंट किलर कहा जाता है. वो इसलिए क्योंकि शुरुआत में इसके लक्षणों के आधार पर इसकी जल्दी पहचान करना बड़ा मुश्किल है. और बाद के लक्षण हर एक आदमी में अलग-अलग होते हैं. किसी को पेट के ऊपरी हिस्से में बेतहाशा दर्द होता है तो किसी का वज़न तेज़ी से गिरता है. पीलिया हो जाना, नाक से खून बहना, भूख कम लगना भी इसके लक्षणों में शामिल हैं.
कहते हैं कि अगर शुरूआती दौर में भी इसका पता लग जाए तब भी इसको रोकना बेहद मुश्किल होता है. और ये बात तो है ही के ये जल्दी डिटेक्ट नहीं होता. इस कैंसर के होने में धूमप्रान से लेकर आहार में हरी सब्जियों की कमी तक कई वजहें बताई जाती हैं.
इलाज कैसे होता है?
1. सर्जरी
सर्जरी इकलौता ऐसा उपाय है जो इस कैंसर को पूरी तरह से ठीक कर सकता है. हालांकि इसमें भी पेंच है. कैंसर का पता लगने से लेकर सर्जरी की नौबत आने तक कैंसर काफी रफ़्तार से बढ़ जाता है. ऐसे में सर्जरी का सक्सेस रेट 15 से 20 परसेंट ही रह जाता है. और अगर कैंसर शरीर में और जगह फ़ैल गया तो सर्जरी के बाद भी इंसान ठीक नहीं होता.
2. रेडियोथेरेपी
इस थेरेपी में कैंसर ग्रस्त एरिया को रेडियो किरणों द्वारा नष्ट करने की कोशिश होती है.
3. कीमोथेरेपी.
कीमोथेरेपी की दवाएं शरीर में फ़ैल रही कैंसर सेल्स को या तो ख़त्म करती हैं या उन्हें बढ़ने से रोकती हैं. अक्सर कीमोथेरेपी, सर्जरी और रेडियोथेरेपी के साथ मिलाकर की जाती है. ताकि ज़्यादा से ज़्यादा एक्यूरेसी से इलाज संभव हो सके. कीमोथेरेपी की कुछ दवाएं खाई जाती है तो कुछ दवाओं को नसों में इंजेक्ट किया जाता है.
जैसे-जैसे कैंसर बढ़ता जाता है, केस कॉम्प्लिकेटेड होता जाता है. भयानक दर्द तो होता ही है साथ ही छोटी आंत की फंक्शनिंग में भी रुकावट पैदा होती है. वज़न तेज़ी से घटने लगता है. ये कैंसर महिलाओं के मुकाबले पुरुषों में ज़्यादा पाया जाता है. वो भी बड़ी उम्र के मर्दों में.
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